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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 100: द्रौपदीके पाँचों पुत्रों और अभिमन्युका राक्षस अलम्बुषके साथ घोर युद्ध एवं अभिमन्युके द्वारा नष्ट होती हुई कौरव-सेनाका युद्धभूमिसे पलायन
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श्लोक 14
श्लोक
6.100.14
शराश्च निशिता: पीता निश्चरन्ति स्म संयुगे।
वनात् फुल्लद्रुमाद् राजन् भ्रमराणामिव व्रजा:॥ १४॥
अनुवाद
युद्धस्थल में उसके धनुष से तीक्ष्ण और चमकते हुए बाण छूट रहे थे, मानो बड़े वृक्षों से भरे हुए वन में से मधुमक्खियों के झुंड निकल रहे हों ॥14॥
On the battlefield, his bow shot sharp and gleaming arrows, as if swarms of bees were emerging from a forest full of mature trees. ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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