श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 1: कुरुक्षेत्रमें उभय पक्षके सैनिकोंकी स्थिति तथा युद्धके नियमोंका निर्माण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.1.8 
यावत्तपति सूर्यो हि जम्बूद्वीपस्य मण्डलम्।
तावदेव समायातं बलं पार्थिवसत्तम॥ ८॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ! सूर्यदेव अपनी किरणों से जम्बूद्वीप की पृथ्वी को जितना तपते हैं, उतनी ही दूर-दूर से सेनाएँ युद्ध के लिए वहाँ आई थीं ॥8॥
 
The best! As much as Suryadev heats the earth of Jambudweep with his rays, armies from far away places had come there for the war. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)