श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 1: कुरुक्षेत्रमें उभय पक्षके सैनिकोंकी स्थिति तथा युद्धके नियमोंका निर्माण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.1.7 
शून्या च पृथिवी सर्वा बालवृद्धावशेषिता।
निरश्वपुरुषेवासीद् रथकुञ्जरवर्जिता॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण पृथ्वी के सभी क्षेत्र युवकों से विहीन होते जा रहे थे। उनमें केवल बालक और वृद्ध ही बचे थे। सम्पूर्ण पृथ्वी घोड़ों, हाथियों, रथों और युवकों से रहित होती जा रही थी।
 
All the regions of the entire earth were becoming desolate of young men. Only children and old people were left in them. The entire earth was becoming devoid of horses, elephants, chariots and young men. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)