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श्लोक 5.97.2  |
कण्व उवाच
अक्षयश्चाव्ययश्चैव ब्रह्मा लोकपितामह:।
तथैव भगवन्तौ तौ नरनारायणावृषी॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| कण्व बोले - राजन् ! जिस प्रकार लोकपितामह ब्रह्मा अक्षय और अविनाशी हैं, उसी प्रकार भगवान नर और नारायण दोनों भी ऋषि हैं ॥2॥ |
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| Kanva said – King! Just as Lokpitamah Brahma is inexhaustible and imperishable, in the same way both Lord Nara and Narayana are also sages. 2॥ |
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