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mahabharat 5.97.18: कण्व ऋषि कहते हैं: मातलि ने वरदान हेतु अनेक देवता, दानव, गन्धर्व, मनुष्य और ऋषियों को देखा, परन्तु उसे कोई भी पसंद नहीं आया॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.97: कण्व मुनिका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए मातलिका उपाख्यान आरम्भ करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 97: कण्व मुनिका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए मातलिका उपाख्यान आरम्भ करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.97.18 
कण्व उवाच
न देवान् नैव दितिजान् न गन्धर्वान् न मानुषान्।
अरोचयद् वरकृते तथैव बहुलानृषीन्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
कण्व ऋषि कहते हैं: मातलि ने वरदान हेतु अनेक देवता, दानव, गन्धर्व, मनुष्य और ऋषियों को देखा, परन्तु उसे कोई भी पसंद नहीं आया॥18॥
 
Sage Kanva says: Matali saw many gods, demons, Gandharvas, humans and sages for a boon, but she did not like anyone.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)