श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 97: कण्व मुनिका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए मातलिका उपाख्यान आरम्भ करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.97.16 
मातु: कुलं पितृकुलं यत्र चैव प्रदीयते।
कुलत्रयं संशयितं कुरुते कन्यका सताम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्री माता के कुल, पिता के कुल तथा जिस कुल में उसका विवाह हुआ है, उन तीनों सत्पुरुषों के कुलों को संदेह में डाल देती है।॥16॥
 
‘A daughter casts into doubt the mother's family, the father's family as well as the family into which she is married - these three families of good men.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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