श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 97: कण्व मुनिका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए मातलिका उपाख्यान आरम्भ करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.97.13 
गुणकेशीति विख्याता नाम्ना सा देवरूपिणी।
श्रिया च वपुषा चैव स्त्रियोऽन्या: सातिरिच्यते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वह देवरूपिणी कन्या गुणकेशी के नाम से विख्यात थी। गुणकेशी अपने सौन्दर्य और सुन्दर शरीर की दृष्टि से उस समय की समस्त स्त्रियों से श्रेष्ठ थी। 13॥
 
She was famous by the name of Devarupini Kanya Gunakeshi. Gunakeshi was superior to all the women of that time in terms of her beauty and beautiful body. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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