श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.95.42 
स्थाता न: समये तस्मिन् पितेति कृतनिश्चया:।
नाहास्म समयं तात तच्च नो ब्राह्मणा विदु:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! आप हमारे ज्येष्ठ पिता हैं, अतः आप हमारे प्रति अपने वचन का सदैव पालन करेंगे (अर्थात् वनवास से लौटने पर आप प्रसन्नतापूर्वक हमारा राज्य हमें लौटा देंगे) - ऐसा निश्चय करके हमने वनवास और अज्ञातवास की शर्तों को कभी नहीं तोड़ा है; यह बात हमारे साथ रहने वाले ब्राह्मण जानते हैं॥ 42॥
 
Father, you are our elder father, therefore you will always keep your word in respect of us (i.e. you will gladly return our kingdom to us upon our return from exile) - having made this determination we have never broken the conditions of exile and incognito living; the Brahmins living with us know this.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)