श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.95.41 
द्वादशेमानि वर्षाणि वने निर्व्युषितानि न:।
त्रयोदशं तथाज्ञातै: सजने परिवत्सरम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
बारह वर्ष तक मैं निर्जन वन में रहा और तेरहवाँ वर्ष मैंने भीड़-भाड़ वाले नगर में अज्ञातवास बिताया॥ 41॥
 
For twelve years I lived in a desolate forest, and the thirteenth year I spent incognito in a crowded city.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)