श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  5.94.d2 
शैब्यस्तु शुकपत्राभ: सुग्रीव: किंशुकप्रभ:।
मेघपुष्पो मेघवर्ण: पाण्डुरस्तु बलाहक:॥
 
 
अनुवाद
उनमें से शैब्य का रंग तोते के पंखों के समान हरा था, सुग्रीव का रंग पलास के पुष्प के समान लाल था, मेघपुष्प का तेज बादलों के समान था और बलाहक का रंग श्वेत था।
 
Among them, Shaibya's colour was green like the parrot's wings. Sugreeva was red like the Palas flower. Meghapushpa's brilliance was like that of the clouds and Balahak was white.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)