श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  5.94.47-48h 
दु:शासन: सात्यकये ददावासनमुत्तमम्॥ ४७॥
विविंशतिर्ददौ पीठं काञ्चनं कृतवर्मणे।
 
 
अनुवाद
दुःशासन ने सात्यकि को सर्वोत्तम आसन दिया और विविंशति ने कृतवर्मा को स्वर्ण आसन दिया। 47 1/2॥
 
Dushasana gave the best seat to Satyaki and Vivimshati gave the golden seat to Kritavarma. 47 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)