vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण
»
श्लोक 47-48h
श्लोक
5.94.47-48h
दु:शासन: सात्यकये ददावासनमुत्तमम्॥ ४७॥
विविंशतिर्ददौ पीठं काञ्चनं कृतवर्मणे।
अनुवाद
दुःशासन ने सात्यकि को सर्वोत्तम आसन दिया और विविंशति ने कृतवर्मा को स्वर्ण आसन दिया। 47 1/2॥
Dushasana gave the best seat to Satyaki and Vivimshati gave the golden seat to Kritavarma. 47 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×