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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण
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श्लोक 37
श्लोक
5.94.37
उत्तिष्ठति महाराजे धृतराष्ट्रे जनेश्वरे।
तानि राजसहस्राणि समुत्तस्थु: समन्तत:॥ ३७॥
अनुवाद
जब महाराज धृतराष्ट्र उठे, तब वहाँ आस-पास बैठे हुए हजारों राजा खड़े हो गए ॥37॥
When Maharaja Dhritarashtra got up, thousands of kings sitting around there stood up. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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