श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 93: श्रीकृष्णका कौरव-पाण्डवोंमें संधिस्थापनके प्रयत्नका औचित्य बताना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.93.8 
सोऽहं यतिष्ये प्रशमं क्षत्त: कर्तुममायया।
कुरूणां सृञ्जयानां च संग्रामे विनशिष्यताम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अतः हे विदुरजी! मैं कौरवों और युद्ध में मर-मिटने को तत्पर सृंजयों के बीच संधि कराने का निष्कपट प्रयत्न करूँगा। ॥8॥
 
Therefore, Vidurji, I will sincerely try to bring about a truce between the Kauravas and the Srinjayas who are ready to die in the war. ॥ 8॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas