श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 93: श्रीकृष्णका कौरव-पाण्डवोंमें संधिस्थापनके प्रयत्नका औचित्य बताना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.93.6 
धर्मकार्यं यतञ्छक्त्या नो चेत् प्राप्नोति मानव:।
प्राप्तो भवति तत् पुण्यमत्र मे नास्ति संशय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई मनुष्य पूरी शक्ति से भी कोई धार्मिक कार्य करने का प्रयत्न करे और उसमें सफल न हो, तो भी उसे उसका फल अवश्य प्राप्त होगा। इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है ॥6॥
 
Even if a man tries to perform a religious deed with all his might and does not succeed in it, he will certainly obtain the merits of it. I have no doubt about this. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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