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श्लोक 5.93.21  |
न चापि मम पर्याप्ता: सहिता: सर्वपार्थिवा:।
क्रुद्धस्य प्रमुखे स्थातुं सिंहस्येवेतरे मृगा:॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे क्रोधित सिंह के सामने अन्य पशु खड़े नहीं हो सकते, वैसे ही यदि मैं क्रोधित हो जाऊँ तो ये सब राजा मिलकर भी मेरा सामना नहीं कर सकेंगे ॥ 21॥ |
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| Just as other animals cannot stand before an enraged lion, similarly if I become angry then even all these kings together will not be able to face me. ॥ 21॥ |
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