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श्लोक 5.93.18  |
मम धर्मार्थयुक्तं हि श्रुत्वा वाक्यमनामयम्।
न चेदादास्यते बालो दिष्टस्य वशमेष्यति॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| यदि मूर्ख दुर्योधन मेरे कष्ट निवारक तथा धर्म और अर्थ के अनुकूल वचनों को सुनकर भी उन्हें ग्रहण नहीं करता, तो उसे दुर्गति भोगनी पड़ेगी ॥18॥ |
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| If the foolish Duryodhana hears my words which are trouble-relieving and in accordance with Dharma and Artha, but does not accept them, then he will have to undergo misfortune. ॥18॥ |
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