मम धर्मार्थयुक्तं हि श्रुत्वा वाक्यमनामयम्।
न चेदादास्यते बालो दिष्टस्य वशमेष्यति॥ १८॥
अनुवाद
यदि मूर्ख दुर्योधन मेरे कष्ट निवारक तथा धर्म और अर्थ के अनुकूल वचनों को सुनकर भी उन्हें ग्रहण नहीं करता, तो उसे दुर्गति भोगनी पड़ेगी ॥18॥
If the foolish Duryodhana hears my words which are trouble-relieving and in accordance with Dharma and Artha, but does not accept them, then he will have to undergo misfortune. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥