श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.92.25 
सर्वे चैते कृतवैरा: पुरस्तात्
त्वया राजानो हृतसाराश्च कृष्ण।
तवोद्वेगात् संश्रिता धार्तराष्ट्रान्
सुसंहता: सह कर्णेन वीरा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! ये सब वही राजा हैं जो पहले आपके विरुद्ध हो गए थे और जिनका आपने सर्वस्व छीन लिया था। आपके भय से ये लोग धृतराष्ट्र के पुत्रों की शरण में आ गए हैं और कर्ण के साथ मिलकर अपना पराक्रम दिखाने के लिए तत्पर हो गए हैं॥ 25॥
 
Sri Krishna! All of these are the same kings who had earlier turned against you and from whom you had taken away everything. Out of fear of you, these people have taken refuge with the sons of Dhritarashtra and have become ready to show their bravery by uniting with Karna.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)