श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 92: विदुरजीका धृतराष्ट्रपुत्रोंकी दुर्भावना बताकर श्रीकृष्णको उनके कौरवसभामें जानेका अनौचित्य बतलाना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  5.92.16-17 
तेषां समुपविष्टानां सर्वेषां पापचेतसाम्।
तव मध्यावतरणं मम कृष्ण न रोचते॥ १६॥
दुर्बुद्धीनामशिष्टानां बहूनां दुष्टचेतसाम्।
प्रतीपं वचनं मध्ये तव कृष्ण न रोचते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण! वे सब पाप-विचारों से युक्त बैठे हैं; इसलिए मुझे आपका उनके बीच जाना अच्छा नहीं लगता। वे सब दुर्बुद्धि, असभ्य और दुष्टचित्त हैं। उनकी संख्या भी बहुत अधिक है। श्रीकृष्ण! आपका उनके बीच जाकर कुछ नकारात्मक कहना मुझे उचित नहीं लगता।॥16-17॥
 
‘Sri Krishna! They are all sitting with sinful thoughts; therefore I do not like your going among them. All of them are ill-intellected, rude and evil-minded. Their number is also very large. Shri Krishna! I do not think it is right for you to go among them and say something negative.॥ 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)