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mahabharat 5.91.2: वह भवन इन्द्रभवन के समान सुन्दर था। उसमें जगह-जगह विचित्र आसन लगे हुए थे। श्रीकृष्ण ने उस भवन में प्रवेश किया॥2॥   |   mahabharat अध्याय 5.91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 91: श्रीकृष्णका दुर्योधनके घर जाना एवं उसके निमन्त्रणको अस्वीकार करके विदुरजीके घरपर भोजन करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.91.2 
लक्ष्म्या परमया युक्तं पुरन्दरगृहोपमम्।
विचित्रैरासनैर्युक्तं प्रविवेश जनार्दन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वह भवन इन्द्रभवन के समान सुन्दर था। उसमें जगह-जगह विचित्र आसन लगे हुए थे। श्रीकृष्ण ने उस भवन में प्रवेश किया॥2॥
 
That house was as beautiful as Indra Bhavan. Bizarre seats were arranged in various places in it. Shri Krishna entered that house. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)