Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.58: परंतप जनार्दन! पाण्डवों का नगर से निकाला जाना और वन में रहने को विवश होना आदि अनेक प्रकार के कष्ट मैंने भोगे हैं ॥ 58॥ | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निर्वासनं च नगरात् प्रव्रज्या च परंतप।
नानाविधानां दु:खानामभिज्ञास्मि जनार्दन॥ ५८॥
अनुवाद
परंतप जनार्दन! पाण्डवों का नगर से निकाला जाना और वन में रहने को विवश होना आदि अनेक प्रकार के कष्ट मैंने भोगे हैं ॥ 58॥
Parantapa Janardana! I have experienced many kinds of sufferings such as the Pandavas being expelled from the city and being forced to live in the forest. ॥ 58॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥