श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 89: श्रीकृष्णका स्वागत, धृतराष्ट्र तथा विदुरके घरोंपर उनका आतिथ्य  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.89.23 
विदुर: सर्वकल्याणैरभिगम्य जनार्दनम्।
अर्चयामास दाशार्हं सर्वकामैरुपस्थितम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी ने अपने घर जाकर दशार्हनन्दन श्रीकृष्ण की समस्त इच्छित भोगों और समस्त शुभ वस्तुओं से पूजा की (और इस प्रकार कहा-)॥23॥
 
Vidur ji went to his house and worshipped Dasharhanandan Sri Krishna with all the desired pleasures and all the auspicious objects (and said thus -)॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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