श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.88.9 
यत् तु कार्यं महाबाहो मनसा कार्यतां गतम्।
सर्वोपायैर्न तच्छक्यं केनचित् कर्तुमन्यथा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! श्रीकृष्ण जो भी कार्य मन में करने का निश्चय करते हैं, उसे कोई भी उलट नहीं सकता, चाहे वह सब प्रकार से प्रयत्न क्यों न करे॥9॥
 
Mahabaho! Whatever work Shri Krishna decides to do in his mind, no one can reverse it, even if he tries all means.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)