श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.88.17 
ततो दुर्योधनमिदं धृतराष्ट्रोऽब्रवीद् वच:।
मैवं वोच: प्रजापाल नैष धर्म: सनातन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् धृतराष्ट्र ने दुर्योधन से कहा - 'हे प्रजापालक दुर्योधन! ऐसी बात अपने मुख से मत कहो। यह सनातन धर्म नहीं है।' 17॥
 
After that Dhritarashtra said to Duryodhana – 'O protector of the people Duryodhana! Don't say such a thing from your mouth. This is not Sanatan Dharma. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)