श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.82.39 
दु:शासनभुजं श्यामं संछिन्नं पांसुगुण्ठितम्।
यद्यहं तु न पश्यामि का शान्तिर्हृदयस्य मे॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं दु:शासन की कटी हुई काली भुजा को धूल में लोटते हुए न देखूं, तो मेरे हृदय को शांति कैसे मिलेगी?
 
If I do not see the dark arm of Dushasan cut off and rolling in the dust, how will my heart find peace?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)