श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.82.10 
अप्रदानेन राज्यस्य यदि कृष्ण सुयोधन:।
संधिमिच्छेन्न कर्तव्यं तत्र गत्वा कथञ्चन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! वहाँ जाकर यदि दुर्योधन अपना राज्य दिए बिना संधि करना चाहे तो आप उसे किसी भी हालत में स्वीकार न करें॥10॥
 
O Lord! When you go there, if Duryodhan wishes to enter into a treaty without giving away his kingdom, then you must not accept it under any circumstances. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)