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mahabharat 5.8.37: 'तात! परंतप! आप इस सम्पूर्ण जगत् का सार जानते हैं। हे श्रेष्ठ राजा भरत! यह आपके बड़े सौभाग्य की बात है कि आपने इस महान् संकट पर विजय प्राप्त कर ली है। 37॥   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.8.37 
सर्वं जगदिदं तात विदितं ते परंतप।
दिष्टॺा कृच्छ्रमिदं राजन् पारितं भरतर्षभ॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
'तात! परंतप! आप इस सम्पूर्ण जगत् का सार जानते हैं। हे श्रेष्ठ राजा भरत! यह आपके बड़े सौभाग्य की बात है कि आपने इस महान् संकट पर विजय प्राप्त कर ली है। 37॥
 
‘Tat! Parantap! You know the essence of this entire world. Bharat, the best king! It is a matter of great good fortune that you have overcome this great crisis. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)