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mahabharat 5.8.27-28h: तत्पश्चात् शत्रुसूदनराज शल्य ने अपने कुशल प्रश्न पूछकर बड़े हर्ष से राजा युधिष्ठिर को गले लगाया। इसी प्रकार हर्ष से भरकर उन्होंने अपने भाइयों भीमसेन और अर्जुन तथा अपनी बहन के जुड़वाँ पुत्रों नकुल और सहदेव को भी गले लगाया।   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  5.8.27-28h 
तत: कुशलपूर्वं हि मद्रराजोऽरिसूदन:।
प्रीत्या परमया युक्त: समाश्लिष्यद् युधिष्ठिरम्॥ २७॥
तथा भीमार्जुनौ हृष्टौ स्वस्रीयौ च यमावुभौ।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शत्रुसूदनराज शल्य ने अपने कुशल प्रश्न पूछकर बड़े हर्ष से राजा युधिष्ठिर को गले लगाया। इसी प्रकार हर्ष से भरकर उन्होंने अपने भाइयों भीमसेन और अर्जुन तथा अपनी बहन के जुड़वाँ पुत्रों नकुल और सहदेव को भी गले लगाया।
 
After that, Shalya, the king of Shatrusudan, after asking his expert questions, hugged King Yudhishthira with great joy. Similarly, filled with joy, he embraced his brothers Bhimsen and Arjun and his sister's twin sons Nakul and Sahadev.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)