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mahabharat 5.8.20: शल्य ने कहा, "नरश्रेष्ठ दुर्योधन! अब तुम अपने नगर को जाओ। मैं शत्रुओं का नाश करने वाले युधिष्ठिर से मिलने जाऊँगा।"   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.8.20 
शल्य उवाच
गच्छ दुर्योधन पुरं स्वकमेव नरर्षभ।
अहं गमिष्ये द्रष्टुं वै युधिष्ठिरमरिंदमम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
शल्य ने कहा, "नरश्रेष्ठ दुर्योधन! अब तुम अपने नगर को जाओ। मैं शत्रुओं का नाश करने वाले युधिष्ठिर से मिलने जाऊँगा।"
 
Shalya said- best of men Duryodhan! Now you go to your city. I will go to meet Yudhishthira, the destroyer of enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)