Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.8.13: उस समय क्षत्रियराज अपने को परम सौभाग्यशाली समझ रहे थे। देवराज इन्द्र भी उन्हें तुच्छ लग रहे थे। उस समय उन्होंने अत्यन्त प्रसन्न होकर अपने सेवकों से पूछा -॥13॥ | mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेनेऽभ्यधिकमात्मानमवमेने पुरंदरम्।
पप्रच्छ स तत: प्रेष्यान् प्रहृष्ट: क्षत्रियर्षभ:॥ १३॥
अनुवाद
उस समय क्षत्रियराज अपने को परम सौभाग्यशाली समझ रहे थे। देवराज इन्द्र भी उन्हें तुच्छ लग रहे थे। उस समय उन्होंने अत्यन्त प्रसन्न होकर अपने सेवकों से पूछा -॥13॥
At that time, that king of Kshatriyas considered himself to be the most fortunate. Even Devraj Indra seemed insignificant to him. At that time, feeling very happy, he asked his servants -॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥