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mahabharat 5.8.1: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! पाण्डवों का सन्देश दूतों से सुनकर राजा शल्य अपने पराक्रमी पुत्रों और विशाल सेना के साथ पाण्डवों के पास गये।   |   mahabharat अध्याय 5.8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 8: शल्यका दुर्योधनके सत्कारसे प्रसन्न हो उसे वर देना और युधिष्ठिरसे मिलकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.8.1 
वैशम्पायन उवाच
शल्य: श्रुत्वा तु दूतानां सैन्येन महता वृत:।
अभ्ययात् पाण्डवान् राजन् सह पुत्रैर्महारथै:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! पाण्डवों का सन्देश दूतों से सुनकर राजा शल्य अपने पराक्रमी पुत्रों और विशाल सेना के साथ पाण्डवों के पास गये।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing the message of the Pandavas from their messengers, King Shalya along with his mighty sons and a huge army went to the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)