vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 79: श्रीकृष्णका अर्जुनको उत्तर देना
»
श्लोक 16
श्लोक
5.79.16
संजानंस्तस्य चात्मानं मम चैव परं मतम्।
अजानन्निव मां कस्मादर्जुनाद्याभिशङ्कसे॥ १६॥
अनुवाद
अर्जुन! दुर्योधन के भाव और मेरे दृढ़ निश्चय को जानकर भी आज तू अज्ञानी की भाँति मुझ पर क्यों संदेह कर रहा है?॥16॥
Arjun! Even after knowing the feelings of Duryodhan and my firm resolve, why are you doubting me like an ignorant person today?॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×