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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 78: अर्जुनका कथन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.78.6 
सम्पाद्यमानं सम्यक् च स्यात् कर्म सफलं प्रभो।
स तथा कृष्ण वर्तस्व यथा शर्म भवेत् परै:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! कोई भी कार्य यदि अच्छी तरह से किया जाए तो वह सफल हो सकता है। श्री कृष्ण! आपको ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि हम अपने शत्रुओं के साथ शांति स्थापित कर सकें।
 
Prabhu! Any task which is done well can be successful. Shri Krishna! You should try to make such efforts that we can make peace with our enemies. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)