श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 78: अर्जुनका कथन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.78.4 
तदिदं भाषितं वाक्यं तथा च न तथैव तत्।
न चैतदेवं द्रष्टव्यमसाध्यमपि किंचन॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आपने जो कहा वह ठीक है; परन्तु यह नहीं कहा जा सकता कि सदैव ऐसा ही रहेगा। किसी भी कार्य को असंभव नहीं समझना चाहिए॥4॥
 
What you have said is correct; but it cannot be said that it will always be like that. No task should be considered impossible.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)