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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 78: अर्जुनका कथन
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श्लोक 3
श्लोक
5.78.3
अफलं मन्यसे वापि पुरुषस्य पराक्रमम्।
न चान्तरेण कर्माणि पौरुषेण फलोदय:॥ ३॥
अनुवाद
अथवा क्या तुम मनुष्य के पराक्रम को व्यर्थ समझते हो; क्योंकि पूर्वजन्म के कर्मों (भाग्य) के बिना केवल प्रयत्न का कोई फल नहीं मिलता॥3॥
Or do you consider man's prowess to be futile; because without the deeds (destiny) of the previous life, mere effort does not yield any result.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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