अतः वृष्णिकुलभूषण श्रीकृष्ण! अब से पाण्डवों के लिए जो भी कार्य करना उचित एवं हितकर समझें, उसे यथाशीघ्र आरम्भ कर दीजिए॥19॥
Hence Vrishnikulbhushan Shri Krishna! Whatever work you consider appropriate and beneficial to be done for the Pandavas from now on, start it as soon as possible. 19॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि अर्जुनवाक्येऽष्टसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें अर्जुनवाक्यविषयक अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥