श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 78: अर्जुनका कथन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.78.17 
जानासि हि यथैतेन द्रौपदी पापबुद्धिना।
परिक्लिष्टा सभामध्ये तच्च तस्योपमर्षितम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तुम जानते हो कि इस पापी दुर्योधन ने सारी सभा के सामने द्रुपदपुत्री कृष्णा को कितना कष्ट दिया, परन्तु हमने चुपचाप उसके इस महान अपराध को सहन किया ॥17॥
 
You know how much pain this sinful Duryodhana caused to Drupada's daughter Krishna in the presence of the whole assembly, but we silently tolerated this great crime of his. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)