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mahabharat 5.77.9: हे भारत! मनुष्य के प्रयत्न से दिव्य कार्य भी पूर्ण होने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। जैसे वस्त्र से शीत, अन्न से ऊष्मा, छाते से वर्षा और अन्न-जल से भूख-प्यास दूर हो जाती है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 77: श्रीकृष्णका भीमसेनको आश्वासन देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.77.9 
दैवमप्यकृतं कर्म पौरुषेण विहन्यते।
शीतमुष्णं तथा वर्षं क्षुत्पिपासे च भारत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! मनुष्य के प्रयत्न से दिव्य कार्य भी पूर्ण होने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। जैसे वस्त्र से शीत, अन्न से ऊष्मा, छाते से वर्षा और अन्न-जल से भूख-प्यास दूर हो जाती है॥9॥
 
O Bharata! Even the divine works are destroyed by human effort before they are completed. Just as cold is removed by clothes, heat by food, rain by umbrella and hunger and thirst by food and water.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)