श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 75: श्रीकृष्णका भीमसेनको उत्तेजित करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.75.19 
अनित्यं किल मर्त्यस्य पार्थ चित्तं चलाचलम्।
वातवेगप्रचलिता अष्ठीला शाल्मलेरिव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! कहते हैं कि मनुष्य का मन सदैव एक ही निश्चय पर स्थिर नहीं रहता। वह वायु के वेग से हिलती हुई रेशमी कपास की फली की गाँठ के समान अस्थिर अवस्था में रहता है॥19॥
 
Partha! It is said that a man's mind does not always remain steadfast on a single decision. It remains in a state of instability like a knot of a pod of silk cotton tree swaying in the force of the wind.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)