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mahabharat 5.74.6: दुर्योधन अपने शुभचिंतक मित्रों के साथ भी विपरीत व्यवहार करता है। उसने न केवल धर्म का परित्याग कर दिया है, बल्कि झूठ बोलना भी अपना प्रिय कार्य बना लिया है। वह अपने मित्रों की बातों का खंडन करता है और उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।   |   mahabharat अध्याय 5.74: भीमसेनका शान्तिविषयक प्रस्ताव   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.74.6 
सुहृदामप्यवाचीनस्त्यक्तधर्मा प्रियानृत:।
प्रतिहन्त्येव सुहृदां वाचश्चैव मनांसि च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन अपने शुभचिंतक मित्रों के साथ भी विपरीत व्यवहार करता है। उसने न केवल धर्म का परित्याग कर दिया है, बल्कि झूठ बोलना भी अपना प्रिय कार्य बना लिया है। वह अपने मित्रों की बातों का खंडन करता है और उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।
 
Duryodhan behaves contrary to even his well-wishing friends. He has not only abandoned Dharma, but has also accepted lying as his favourite thing. He refutes the words of his friends and hurts their feelings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)