Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.74.23: मैं शांति स्थापित करने के लिए यह कह रहा हूँ। राजा युधिष्ठिर भी शांति की प्रशंसा करते हैं और अर्जुन भी युद्ध में रुचि नहीं रखते, क्योंकि अर्जुन महान करुणा से युक्त हैं॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 5.74: भीमसेनका शान्तिविषयक प्रस्ताव । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहमेतद् ब्रवीम्येवं राजा चैव प्रशंसति।
अर्जुनो नैव युद्धार्थी भूयसी हि दयार्जुने॥ २३॥
अनुवाद
मैं शांति स्थापित करने के लिए यह कह रहा हूँ। राजा युधिष्ठिर भी शांति की प्रशंसा करते हैं और अर्जुन भी युद्ध में रुचि नहीं रखते, क्योंकि अर्जुन महान करुणा से युक्त हैं॥ 23॥
I am saying this to establish peace. King Yudhishthira also praises peace and Arjuna is also not interested in war because Arjuna is filled with great compassion.॥ 23॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि भीमवाक्ये चतु:सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें भीमवाक्यविषयक चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥