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mahabharat 5.73.6: परंतु हे धृतराष्ट्रपुत्र! वे बड़े लोभी हैं। उन्होंने बहुत से मित्रों और राजाओं को इकट्ठा कर लिया है और बहुत समय तक उनके साथ रहकर उनके प्रति अपना प्रेम भी बढ़ा लिया है। (विद्या और अभ्यास आदि से) उन्होंने विशेष शक्ति भी एकत्रित कर ली है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.73.6 
अतिगृद्धा: कृतस्नेहा दीर्घकालं सहोषिता:।
कृतमित्रा: कृतबला धार्तराष्ट्रा: परंतप॥ ६॥
 
 
अनुवाद
परंतु हे धृतराष्ट्रपुत्र! वे बड़े लोभी हैं। उन्होंने बहुत से मित्रों और राजाओं को इकट्ठा कर लिया है और बहुत समय तक उनके साथ रहकर उनके प्रति अपना प्रेम भी बढ़ा लिया है। (विद्या और अभ्यास आदि से) उन्होंने विशेष शक्ति भी एकत्रित कर ली है॥6॥
 
But, O son of Dhritarashtra, they are very greedy. They have gathered many friends and kings and by staying with them for a long time, they have also increased their love for them. (Through education and practice etc.) they have also accumulated special power.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)