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mahabharat 5.73.39: मृग और पक्षी भयंकर शब्द कर रहे हैं। प्रदोष काल में अग्रगण्य हाथी-घोड़ों के साथ अत्यंत भयानक आकृतियाँ प्रकट होती हैं। इसी प्रकार अग्निदेव भी नाना प्रकार के भयानक रंग धारण करते हैं॥ 39॥   |   mahabharat अध्याय 5.73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 73: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको युद्धके लिये प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.73.39 
मृगा: शकुन्ताश्च वदन्ति घोरं
हस्त्यश्वमुख्येषु निशामुखेषु।
घोराणि रूपाणि तथैव चाग्नि-
र्वर्णान् बहून् पुष्यति घोररूपान्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
मृग और पक्षी भयंकर शब्द कर रहे हैं। प्रदोष काल में अग्रगण्य हाथी-घोड़ों के साथ अत्यंत भयानक आकृतियाँ प्रकट होती हैं। इसी प्रकार अग्निदेव भी नाना प्रकार के भयानक रंग धारण करते हैं॥ 39॥
 
The deer and birds are making terrifying sounds. During the Pradosha period, very terrifying figures appear in the company of the leading elephants and horses. Similarly, the fire god also assumes various types of terrifying colours.॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)