तत्र न: प्रथम: कल्पो यद् वयं ते च माधव।
प्रशान्ता: समभूताश्च श्रियं तामश्नुवीमहि॥ ४२॥
अनुवाद
माधव! इस विषय में हमारा प्रथम उद्देश्य यही है कि हम और कौरव परस्पर सन्धि करके शान्तिपूर्वक रहें और उस धन का समान रूप से उपभोग करें ॥ 42॥
Madhava! Our first aim in this matter is that we and the Kauravas should enter into a treaty with each other and live in peace and enjoy that wealth equally. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥