श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 70: भगवान‍् श्रीकृष्णके विभिन्न नामोंकी व्युत्पत्तियोंका कथन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.70.9 
हर्षात् सुखात् सुखैश्वर्याद्‍धृषीकेशत्वमश्नुते।
बाहुभ्यां रोदसी बिभ्रन्महाबाहुरिति स्मृत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
आनंद और प्रसन्नता से परिपूर्ण होने के कारण उन्हें हृषीक कहा जाता है और सुख-समृद्धि से परिपूर्ण होने के कारण उन्हें 'ईश' कहा जाता है। इस प्रकार, भगवान का नाम 'हृषीकेश' है। अपनी दो भुजाओं से भगवान इस पृथ्वी और आकाश को धारण करते हैं, इसलिए उनका नाम 'महाबाहु' है।
 
He is called Hrishik because he is filled with joy and happiness and is called 'Ish' because he is full of happiness and prosperity. Thus, the Lord bears the name 'Hrishikesh'. With his two arms, the Lord holds this earth and the sky, hence his name is 'Mahabahu'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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