श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 70: भगवान‍् श्रीकृष्णके विभिन्न नामोंकी व्युत्पत्तियोंका कथन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.70.4 
मौनाद् ध्यानाच्च योगाच्च विद्धि भारत माधवम्।
सर्वतत्त्वमयत्वाच्च मधुहा मधुसूदन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भारतवर्ष में मौन, ध्यान और योग के द्वारा उनकी अनुभूति या साक्षात्कार होता है; अतः तुम्हें उन्हें 'माधव' समझना चाहिए। मधुसूदन श्रीकृष्ण पृथ्वी आदि समस्त तत्त्वों के मूल और आधार होने के कारण 'मधु' कहे गए हैं, जो मधु शब्द से निरूपित होते हैं।॥4॥
 
India They are realized or realized through silence, meditation and yoga; Therefore you should consider him as 'Madhava'. Madhusudan Shri Krishna has been called 'Madhuha' due to being the source and foundation of all the elements like earth etc. which is represented by the word Madhu. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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