श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 70: भगवान‍् श्रीकृष्णके विभिन्न नामोंकी व्युत्पत्तियोंका कथन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.70.2 
संजय उवाच
श्रुतं मे वासुदेवस्य नामनिर्वचनं शुभम्।
यावत् तत्राभिजानेऽहमप्रमेयो हि केशव:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- राजन! मैंने वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण के नामों की शुभ व्युत्पत्ति सुनी है, जितना मुझे स्मरण है, उतना ही कह रहा हूँ। वास्तव में भगवान श्रीकृष्ण समस्त प्राणियों की पहुँच से परे हैं।
 
Sanjay said- Rajan! I have heard the auspicious etymology of the names of Vasudevanandan Shri Krishna, I am telling as much as I can remember. In fact, Lord Shri Krishna is beyond the reach of all living beings. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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