श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 7: श्रीकृष्णका दुर्योधन तथा अर्जुन दोनोंको सहायता देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.7.39 
वैशम्पायन उवाच
एवं प्रमुदित: पार्थ: कृष्णेन सहितस्तदा।
वृतो दशार्हप्रवरै: पुनरायाद् युधिष्ठिरम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार प्रसन्न होकर (अपनी इच्छा पूरी होने से) अर्जुन श्रीकृष्ण के साथ तथा दाशार्घवंश के प्रमुख यादवों से घिरे हुए पुनः युधिष्ठिर के पास आये।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! Thus pleased (due to the fulfillment of his wish), Arjuna, accompanied by Sri Krishna and surrounded by the chief Yadavas of the Dasharha dynasty, again came to Yudhishthira.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि कृष्णसारथ्यस्वीकारे सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें श्रीकृष्णका सारथ्यस्वीकारविषयक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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