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श्लोक 5.7.37  |
सारथ्यं तु त्वया कार्यमिति मे मानसं सदा।
चिररात्रेप्सितं कामं तद् भवान् कर्तुमर्हति॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| बहुत दिनों से मेरे हृदय में यह अभिलाषा थी कि मैं आपको अपना सारथी बनाऊँ - अपने जीवन-रथ की बागडोर आपके हाथों में सौंप दूँ। कृपया मेरी इस चिरकालीन अभिलाषा को पूर्ण करें॥ 37॥ |
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| For a long time I have had this desire in my heart to make you my charioteer - to hand over the reins of my life's chariot in your hands. Please fulfill this long-standing desire of mine.॥ 37॥ |
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