Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.7.27-28: कुरुनंदन! तुम्हारे लिए ही मैंने श्रीकृष्ण को यह कहने पर विवश किया था कि हम दोनों पक्षों का समान संबंध है। राजन! मैंने यह बात बार-बार दोहराई, परंतु श्रीकृष्ण को यह बात अच्छी नहीं लगी और मैं एक क्षण भी श्रीकृष्ण को छोड़कर अन्यत्र नहीं रह सकता। | mahabharat अध्याय 5.7: श्रीकृष्णका दुर्योधन तथा अर्जुन दोनोंको सहायता देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निगृह्योक्तो हृषीकेशस्त्वदर्थं कुरुनन्दन।
मया सम्बन्धकं तुल्यमिति राजन् पुन: पुन:॥ २७॥
न च तद् वाक्यमुक्तं वै केशवं प्रत्यपद्यत।
न चाहमुत्सहे कृष्णं विना स्थातुमपि क्षणम्॥ २८॥
अनुवाद
कुरुनंदन! तुम्हारे लिए ही मैंने श्रीकृष्ण को यह कहने पर विवश किया था कि हम दोनों पक्षों का समान संबंध है। राजन! मैंने यह बात बार-बार दोहराई, परंतु श्रीकृष्ण को यह बात अच्छी नहीं लगी और मैं एक क्षण भी श्रीकृष्ण को छोड़कर अन्यत्र नहीं रह सकता।
Kuru Nandan! For your sake I had forced Shri Krishna to say that both the parties have equal relations with us. King! I repeated that again and again, but Shri Krishna did not like it and I cannot stay anywhere else except Shri Krishna for even a moment.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥