श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 7: श्रीकृष्णका दुर्योधन तथा अर्जुन दोनोंको सहायता देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.7.26 
बलदेव उवाच
विदितं ते नरव्याघ्र सर्वं भवितुमर्हति।
यन्मयोक्तं विराटस्य पुरा वैवाहिके तदा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
बलदेव जी बोले - पुरुषसिंह! राजा विराट के विवाहोत्सव के समय मैंने जो कुछ तुमसे कहा था, वह सब तुम्हें ज्ञात हो गया होगा।
 
Baldev Ji said - Purushsingh! You must have come to know everything that I had told you earlier during the wedding ceremony of King Virat.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas